नवंबर 2025 के आखिर में दक्षिण थाईलैंड में भारी बाढ़ आई। खासकर सोंगख्ला प्रांत के हाट याई जिले में हालात गंभीर थे। जैसे-जैसे पानी ने घर और बाजार डुबोए, सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलने लगीं कि बाढ़ में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लोग डर गए। लेकिन जल्द ही सरकार ने साफ कहा कि यह संख्या पूरी तरह गलत है।
सरकार ने क्या बताया असली आंकड़ा बनाम अफवाह
थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय (MoPH) के अनुसार, आधिकारिक मौत का आंकड़ा 1,000 के आसपास तो क्या, उसके पास भी नहीं पहुंचा। आधिकारिक संख्या 170 से बढ़कर 179 हुई यानी अफवाह से बहुत कम।
MoPH के डिप्टी परमानेंट सेक्रेटरी सकडा अलापाच ने कहा कि शुरुआत में शवों की संख्या ज्यादा दिख रही थी क्योंकि कई शव अस्थायी कोल्ड स्टोरेज में रखे जा रहे थे। लेकिन बाद में पहचान और प्रक्रिया पूरी होने पर असली आंकड़ा सामने आया।
| श्रेणी | आधिकारिक संख्या | अफवाह की संख्या |
|---|---|---|
| कुल बाढ़ से मौतें | 179 | 1,000+ |
| हाट याई / सोंगख्ला में मौतें | लगभग 140 | कोई स्पष्ट डेटा नहीं |
जैसा कि तालिका दिखाती है, दोनों संख्याएँ बिल्कुल अलग थीं।
अफवाह कैसे फैली कहाँ हुई गलती
तो अफवाह इतनी तेजी से क्यों फैली? कुछ कारण थे
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आपदा की अफरातफरी: बाढ़ के दौरान शव अलग-अलग जगह ले जाए जाते हैं। कई बार एक ही शरीर दो जगह लिस्ट हो जाता है। इससे भ्रम बढ़ता है।
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सोशल मीडिया का असर: संकट के समय डर और गलत जानकारी आसानी से वायरल हो जाती है।
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बिना पुष्टि वाले दावे: यह दावा एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने किया था, लेकिन इसके पीछे कोई आधिकारिक सबूत नहीं था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया कि सिर्फ पोस्टमार्टम और प्रमाणित रिकॉर्ड ही मान्य होते हैं।
इसका असर लोगों, परिवारों और जनता पर
सरकार का मकसद सिर्फ घबराहट कम करना नहीं था, बल्कि सही सूचना देना था। हालांकि 179 मौतें भी कम नहीं हैं। कई लोग बेघर हुए, कई लापता रहे, और आर्थिक नुकसान भारी रहा।
परिवारों के लिए सही आंकड़े जरूरी हैं ताकि वे अपने प्रियजनों के बारे में सटीक जानकारी पा सकें। जनता के लिए यह घटना याद दिलाती है कि संकट के समय सही और प्रमाणित जानकारी ही सबसे भरोसेमंद होती है।
निष्कर्ष
दक्षिण थाईलैंड की बाढ़ बेहद विनाशकारी थी। लेकिन 1,000 मौतों की अफवाह पूरी तरह गलत निकली। आधिकारिक संख्या 179 है। यह दुखद है, लेकिन अफवाह जितनी नहीं। संकट के समय गलत जानकारी तेज गति से फैलती है, इसलिए भरोसा हमेशा प्रमाणित स्रोतों पर करें।
अब ज़रूरत है कि हम पीड़ितों की मदद, पुनर्निर्माण और भविष्य में ऐसी तबाही रोकने पर ध्यान दें, न कि अफवाहों पर।